November 28, 2021

Aabeed Gehlod

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Janmashtami 2021-UP में इस जगह है भगवान कृष्ण की ससुराल, धूमधाम से मनाई जाती है जन्माष्टमी

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Janmashtami 2021

Janmashtami 2021-गौरव श्रीवास्तव / औरैया : कृष्ण जयंती का समय आते ही मंदिरों में तैयारियां तेज होने लगती हैं. लेकिन औरैया का कुदरकोट मंदिर अपने आप में एक विशेष स्थान रखता है। दरअसल, कुदरकोट की पहचान भगवान कृष्ण की ससुराल के नाम पर ही रहती है। माता अलोपा देवी का यह मंदिर खेड़ा के शीर्ष पर बनाया गया था। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पावन पर्व को मनाने के लिए यहां बड़ी धूमधाम से तैयारियां की जाती हैं।

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कुदरकोट शहर कुंदनपुरी से जाना जाता था ( The city of Kudarkot was known as Kundanpuri )

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार औरैया के कुदरकोट शहर को द्वापर युग के दौरान कुंदनपुर के नाम से जाना जाता था। कुंदनपुर देवी रुक्मणी के पिता राजा भीष्मक की राजधानी हुआ करती थी। माता गौरी की पूजा करने के लिए देवी रुक्मणी प्रतिदिन इस मंदिर में आती थीं। देवी रुक्मणी के भाई रुकुम पिता भीष्मक द्वारा श्री कृष्ण से विवाह की बात को बर्दाश्त नहीं कर सके, इसलिए उन्होंने अपने बहनोई शिशुपाल के साथ देवी रुक्मणी का विवाह तय किया।

धूमधाम से मनाई जन्माष्टमी ( Janmashtami celebrated with pomp )

यहां के लोग जन्माष्टमी के त्योहार को भगवान कृष्ण की भक्ति में बड़ी धूमधाम से मनाते हैं। यह भी माना जाता है कि उस दिन के बाद से इस गांव के लोग इस गांव में शादी से पहले तेल चढ़ाई की रस्म नहीं करते हैं। यहां के लोग जन्माष्टमी को संगीत के प्रति बड़ी श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाते हैं। 2016 में यहां एक रहस्यमयी सुरंग भी मिली थी, कहा जाता है कि यह द्वापर काल की बनी हुई है, जिसके कारण रुक्मणी इस सुरंग के जरिए पूजा करने जाया करती थीं।

भगवान कृष्ण की ससुराल के नाम से प्रसिद्ध हुआ कुदरकोट (Kudarkot became famous by the name of Lord Krishna’s in-laws )

देवी रुक्मणी कृष्ण को बहुत प्रिय थीं। जब देवी रुक्मणी इस मंदिर में नियमानुसार पूजा करने आई तो श्रीकृष्ण ने उनका अपहरण कर लिया। वहीं माता गौरी भी इस मंदिर से अलग हो गईं। तभी से इस मंदिर को अलोपा देवी मंदिर के नाम से जाना जाता है। और कुदरकोट भगवान कृष्ण के ससुराल के नाम से प्रसिद्ध हुआ।